हमारे वायुमंडल में मौजूद कण(गैस,धूल,रेत) पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण क्यों पृथ्वी के सतह पे क्यों नहीं आते हैं ?


 पृथ्वी के वायुमंडल में बहुत से कण(रेत,धूल,गैस) है जो अपनी चालSpeed) से गति करते हैं तथा हम सभी जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) दो वस्तुओं के बीच हमेशा लगता है जिसमें द्रव्यमान (Mass) हो उसमें गुरुत्वाकर्षण बल लगता है तथा यह भी जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा ही वस्तु को अपनी ओर आकर्षित(Attract) करता है अर्थात गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण प्रवृत्ति(Attracrive Nature) का होता है इसलिए जब हम किसी गेंद को किसी ऊंचाई से छोड़ते हैं तो पृथ्वी उसे अपनी ओर खींच लेती है इसी प्रकार हमारे वायुमंडल में बहुत से कण 
(रेत,धूल,गैस)हैं तथा उनके पास भी द्रव्यमान है तो पृथ्वी इन कोणों को अपनी ओर क्यों नहीं खींच पाती है

                                  यहां इन कणों पर गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी के द्वारा लगाया जाता है तो इन बल को संतुलित(Balance) कौन करता है अर्थात गुरुत्वाकर्षण बल इन कणों पर नीचे के दिशा में लगता है जबकि ये नीचे नहीं आते तो इन को संतुलित कौन करता है यानि ये गुरुत्वाकर्षण के विपरीत कैसे कार्य करते है

                                          गुरुत्वाकर्षण बल को सामान्यतः चाल(Speed) और दाब(Pressure) ही संतुलित करते हैं इन कणों के पास अपनी एक चाल होती है जिससे यह गति करते हैं और यही चाल पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को संतुलित करती है अगर कणों का चाल कम हो जाए तो यह पृथ्वी के गुरुतकर्षण बल के कारण पृथ्वी की सतह पर आ जाएंगे तथा अगर  इनका(रेत,धूल,गैस) चाल और ज्यादा हो गया तो ये पृथ्वी की सतह से बहुत ऊपर चले जाएंगे | पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षणबल के  कारण ही ये वायुमंडल के कण पृथ्वी से बंधे हुए है और यहाँ गुरुत्वाकर्षण बल को गति ही संतुलित करती है 


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