कृत्रिम उपग्रह के अंदर कोई व्यक्ति भारहीन महसूस करता है परंतु चंद्रमा पर नहीं क्यों ?




हम सभी जानते हैं कि चंद्रमा तथा कृत्रिम उपग्रह दोनोंं ही पृथ्वी के चक्कर लगाते हैं तो कृत्रिम उपग्रह के अंदर कोई व्यक्ति भारहीन महसूस क्यों करता है जबकि चंद्रमा पर नहीं 

चंद्रमा एक प्राकृतिक उपग्रह है जिसका द्रव्यमान कृत्रिम उपग्रह से कई गुना ज्यादा होता है अगर कोई व्यक्ति चंद्रमा पर है तो उस पर चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल लगता है तथा अगर कोई व्यक्ति कृत्रिम उपग्रह के अंदर है तो उस पर कृत्रिम उपग्रह के द्वारा जो गुरुत्वाकर्षण बल उत्पन्न होता है वह लगता है परंतु कृत्रिम उपग्रह का द्रव्यमान कम होने के कारण कृत्रिम उपग्रह में उपस्थित व्यक्ति पर जो गुरुत्वाकर्षण बल लगता है वह बहुत कम लगता है परंतु चंद्रमा पर उपस्थित कोई व्यक्ति पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल कृत्रिम उपग्रह के अपेक्षा बहुत ज्यादा लगता है क्योंकि चंद्रमा का द्रव्यमान कृत्रिम उपग्रह के द्रव्यमान से बहुत ज्यादा है इसलिए हमें कृत्रिम उपग्रह में भारहीन महसूस होता है जबकि चंद्रमा जो कि पृथ्वी का ही एक उपग्रह है उस पर हमें कृत्रिम उपग्रह के अपेक्षा बहुत ज्यादा भार महसूस होता है ।

                                         हम पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल को चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल से तुलना करें तो हमें पृथ्वी पर ज्यादा भार महसूस होगा क्योंकि पृथ्वी पर g का मान चंद्रमा का अपेक्षा ज्यादा होता है ।  

                                  चन्द्रमा पर g का मान 1.63 होता है यानी (g/6) | पृथ्वी पर g का मान 9.8 होता है

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