सौरमंडल, सूर्य, ग्रह, उपग्रह के उत्पत्ति के सामान्यतः तीन सिद्धांत मिलते हैं विपद्कारी (Catastrophic), ग्रैडुअलिस्टिक (Gradualistic), निहारिका परिकल्पना (Nebula Hypothesis)
विपद्कारी (Catastrophic) सिद्धांत के अनुसार किसी विशालकाय धूमकेतु के सूर्य से टकराने के कारण निष्कासित पदार्थ द्वारा ग्रहों का निर्माण हुआ अथवा कोई अन्य तारा जब सूर्य के नजदीक से गुजरा होगा जिसके कारण सूर्य पर ज्वार भाटा उठे और सूर्य से जो पदार्थ निकले उससे ग्रह बने
ग्रैजुअली स्टिक (Gradualistic) सिद्धांत के अनुसार ग्रहों की उत्पत्ति धीरे-धीरे हुई तथा तारों के अवशेषों से ग्रहों का निर्माण हुआ
निहारिका परिकल्पना (Nebula Hypothesis) के अनुसार हमारे सौरमंडल का जन्म घूर्णी अंतरातारकीय बादलों(Rotational Interstellar clouds) के सिकुड़ने(Contraction) से हुआ है इन बादलों को सौर निहारिका(Solar Nebula) कहते हैं । घूर्णन के कारण निहारिका का आकार एक डिस्क(Disk) जैसा हो जाता है । जब इन बादलों का आकार एक पर्याप्त द्रव्यमान के बराबर हो जाता है तो इन पर गुरुत्वाकर्षण बल लगने लगता है और ये सिकुड़ने लगते हैं तो अंतरातारकीय बादलों के सिकुड़ने से बादलों का घनत्व बढ़ जाता है जिससे बादलों के बीच का तापमान भी बढ़ जाता है जिससे बादलों के भीतर का दाब, जिसे आतंरिक दाब(Internal Pressure) कहते हैं, बढ़ने लगता है
गुरुत्वाकर्षण बल तथा आंतरिक दाब(Internal Pressure) के कारण सौर निहारिका के मध्य में सूर्य का निर्माण होने लगता है तथा इसके काफी प्रकाशमय हो जाने के बाद सूर्य का विकिरण दाब(Radiation Pressure) बढ़ने लगता है जिसके कारण शेष गैस और धूल सूर्य से काफी दूर चले जाते हैं और दूर जाकर यह गैस और धूल ठंडे हो जाते है तथा इनका चाल भी कम हो जाता है तब ये ग्रहों का रूप के रूप में जम जाते है और इन पर सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल के वजह से ये सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने लगते है



