कृष्ण विवर(Black Holes) के निर्माण की सही प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी नहीं है फिर भी इसके निर्माण के Different-Different Theories हैं
किसी भी तारे का क्रोड(Core) बहुत ज्यादा कठोर होता हैं। तारों के क्रोड(Core) में नाभिकीय अभिक्रिया चल रही होती है जिससे क्रोड में आंतरिक दाब(Internal Pressure) उत्पन्न हो जाता है जिससे क्रोड(Core) विस्फोट होना चाहता है परंतु बाहर से गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational force) लग रहा होता है । तारे का क्रोड(Core) आंतरिक दाब(Internal Pressure) के वजह से विस्फोट करना चाहता है परंतु बाहर से गुरुत्वाकर्षण बल के वजह से भी विस्फोट नहीं हो पाता। क्योंकि गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational force) क्रोड(Core) के अंदर उत्पन्न हो रहे आंतरिक दाब(Internal Pressure) से बहुत ज्यादा होता है यही कारण है कि यह विस्फोट नहीं हो पाता। जिससे क्रोड(Core) और ज्यादा कठोर या मजबूत होता जाता है और इसके अंदर बहुत से तत्व जैसे लोहा सारे तत्व(Elements) बनने लगते हैं
जब तारे का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान के तिगुने से अधिक होता है और इसके क्रोड(Core) में होने वाली नाभिकीय अभिक्रिया(Nuclear Reaction) बंद हो जाती है तो आंतरिक दाब(Internal Pressure) भी खत्म हो जाता है परंतु गुरुत्व बल हमेशा ही लगता रहता है क्रोड(Core) के अंदर से कोई बल या दाब गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational force) को संतुलित नहीं कर रहा होता है जिसके वजह (गुरुत्वाकर्षण बल Gravitational force)से पिंड या तारे की त्रिज्या शून्य और घनत्व अनंत हो जाता है और ऐसे पिंडो का या तारों का गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational force) इतना प्रबल हो जाता है कि प्रकाश भी इसके प्रभाव क्षेत्र से बाहर नहीं जा पाता ऐसे पिंड को कृष्ण विवर(Black Holes) कहते हैं।
कृष्ण विवर(Black Holes) एक बिंदु स्वरूप पिंड है जब कोई पदार्थ कृष्ण विवर(Black Hole) में गिरता है तब तप्त होकर उच्च तापमान(High Temperature) प्राप्त कर लेता है और एक्स किरण उत्पन्न करता है अगर हमें कृष्ण विवर(Black Hole) की खोज करनी है तो हमें एक्स किरणों वाले युग्म तारों या पिंडो(Objects) का अध्ययन करना होगा।
कृष्ण विवर(Black Holes) के लिए द्रव्यमान का कोई Range नहीं होता। एक प्रकार के कृष्ण विवरों(Black Holes) का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान का 6 से 14 गुना अधिक होता है तथा दूसरे प्रकार के कृष्ण विवर(Black Holes) का द्रव्यमान 10^6 सौर द्रव्यमान से 10^9 सौर द्रव्यमान तक होता है इस प्रकार के कृष्ण विवर(Black Holes) संभवत: मंदाकिनियों(Galaxies) के केंद्र में स्थित मिलते हैं।
कृष्ण विवर(Black Holes) से प्रकाश भी नहीं निकल सकता है इसलिए कृष्ण विवर(Black Holes) हमें काला दिखाई देता है। जो भी पदार्थ इसके निकट आता है वह काफ़ी प्रबल बल से इसको अपनी ओर खींच लेता है
ऐसा माना जाता है कि जहां गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational force) ज्यादा होता है वहां समय धीरे काम करता है तो हम अनुमान लगा सकते हैं कि ब्लैक होल(Black Holes) के पास समय के साथ क्या होता होगा क्योंकि कृष्ण विवर (Black Holes) के पास बहुत ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल होता है