हम सभी जानते हैं गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) हमेशा ही आकर्षण प्रकृति(Attractive Nature) का होता है । और गुरुत्वाकर्षण(Gravitational Force) बहुत पास-पास वस्तुओं में तथा बहुत दूर-दूर वस्तुएं में भी लगता है। और यह कुछ दूरी तक जाकर समाप्त नहीं होता।
हमने यह भी जानते हैं कि हमारा ब्रह्माण्ड(Universe) फैल रहा है यानी तारें और मंदाकिनी(Stars And Galaxies) एक दूसरे से दूर जा रही है तो उनमें भी गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) लग रहा है। गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) के कारण उनको पास पास आना चाहिए या उनको सिकुड़ना(Shrink) चाहिए लेकिन इसके विपरीत हमारा ब्रह्माण्ड(Universe) फैल रहा है। और हमारे सौरमंडल में बहुत से ग्रह(Stars),उपग्रह(Satellite)और एक तारा सूर्य भी है। गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) दो वस्तुओं के बीच लगता है हमारे सौरमंडल में इतने सारे ग्रहें(Stars),उपग्रहें(Satellite) है वह सारे एक दूसरे को गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) के वजह से आकर्षित होते हैं परंतु हमारा सौरमंडल सिकुड़ नहीं रहा है इसी प्रकार हम यह पूछ सकते हैं कि खगोलीय पिंड(Celestial Objects) जैसे तारे(Stars),मंदाकिनीयां(Galaxies)और हमारे जैसे और सौर मंडल(Solar system), आकार में सिकुड़ क्यों नहीं रहे हैं जैसे हमारा सौरमंडल भी नहीं सिकुड़ रहा है वह फैल रहा है, हमारा ब्राह्मण(Universe) भी फैल रहा है जब गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) आकर्षण प्रवृत्ति का है तो तारे(Stars),मंदाकिनीयां(Galaxies) और हमारा सौर मंडल(Solar System) सिकुड़(Shrink) कर एक स्थान पर हो जाना चाहिए परंतु ऐसा नहीं है। क्या कोई अन्य बल है जो गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) को संतुलित(Balance) कर रहा है जिसके वजह से यह तारे और मंदाकिनीय(Stars And Galaxies) और हमारा सूर्य मंडल(Solar System) सिकुड़(Shrink) कर एक स्थान पर नहीं आ पा रहे हैं????
विरियल प्रमेय(Virial Theorem) के अनुसार, यदि किसी तारो समूह या मंदाकिनी के समूह(Stars And Galaxies) , सिकुड़ नहीं रहे हैं तो इसका मतलब, उन सभी तारों या मंदाकिनी(Stars And Galaxies) के गतिज ऊर्जा उनकी कुल गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा से संबंधित है । विरियल प्रमेय(Virial Theorem) में हमें यह बताता है कि किसी भी निकाय, यानि तारे(Stars) और मंदाकिनी (Galaxy), की गुरुत्वीय ऊर्जा(Gravitational Potential Energy)और गतिज ऊर्जा(Kinetic Energy) एक ही कोटि(Same Order) की होनी चाहिए तभी गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) गति द्वारा संतुलित(Balance) होगी
गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) को केवल दो ही चीज संतुलित(Balance) करती है एक दाब और दूसरा गति। यहां खगोलीय पिंडों, जैसे तारे(Stars) और मंदाकिनीयां(Galaxies), की यादृच्छिक(Random) गति के वजह से यह नहीं सिकुड़ते(Shrink) है। अर्थात हम यह कह सकते हैं कि जो नहीं सिकुड़(Shrink) रहे है तो उसके गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) को गति या दाब संतुलित(Balance) कर रहे हैं
इसी यादृच्छिक गतियों(Random Speeds) के कारण तारें(Stars), ग्रहें(Planets) और उपग्रहें(Satellites) अपने केंद्र की ओर नहीं गिरते जबकि उनके ऊपर गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) लग रहा होता है। तथा पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) हवा के सभी कोणों को अपनी ओर खींचता है तब भी सभी कण कमरे के फर्श पर नहीं गिरते हैं क्योंकि कणों की यादृच्छिक गतियां(Random Speeds) इन्हें नीचे गिरने नहीं देती है