हमारे ब्राह्मण(Universe) में सामान्यतः चार प्रकार के विस्फोट देखने को मिलता है नया तारा या नोवा(Nova),अधिनव तारा या सुपरनोवा Supernovae), सुपरल्यूमिनस सुपरनोवा (Superluminous Supernova) और हाइपर्नोवा(Hypernova).
जब तारकीय निहारिका(Stellar Nebula) में प्रोटोतारा(Protostar) का निर्माण होता है ।प्रोटोतारा(Protostar) के निर्माण के बाद एक बड़े तारे(Large Star)या एक विशाल तारे(Giant Star) का निर्माण होता है यह तय करना कि एक बड़े तारे(Large Star) या एक विशाल तारे(Giant Star) का निर्माण होना है यह प्रोटोतारा(Protostar) के प्रारंभिक द्रव्यमान(Initial Mass) पर निर्भर करता है उसके बाद इन तारों से लाल विशाल दानवाकार तारा(Red Giant Star) का निर्माण होता है। इस लाल विशाल दानवाकार तारा(Red Giant Star) का सारा इंधन समाप्त हो जाता है परंतु बाहर से गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) हमेशा लगता रहता है।गुरुत्वाकर्षण बल(Gravitational Force) हमेशा लगने के कारण क्रोड(Core) के ऊपरी आवरण(Upper Layer) में एक बहुत बड़ा विस्फोट(Explosion) होता है जिसे अधिनवतारा(Supernova) कहते हैं या जब तारे का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान द्रव्यमान के 10 गुना से ज्यादा हो जाता है तथा जब तक क्रोड(Core) के अंदर की अभिक्रिया(Reaction) बंद हो जाती है जिससे क्रोड(Core) में मौजूद ऊर्जा क्रोड(Core) के आवरण में आ जाती है और क्रोड के आवरण का तापमान बढ़ जाता है जिससे आवरण में बहुत से नाभिकीय अभिक्रिया शुरू होने लगती है जिससे आवरण गर्म हो जाता है और अंत में आवरण में विस्फोट(Explosion) होता है इस विस्फोट(Explosion) को अधिनवतारा(Supernova) कहते है और तारे में जितने भी तत्वों का निर्माण अपने जीवन काल में किया होता है वह अंतराताकीय माध्यम(InterStellar Medium) में चला जाता है।
अधिनवतारा(Supernova) बहुत ज्यादा ही प्रचंड(Violent) और चमकीला या दीप्त(Bright) तारकीय विस्फोट(Stellar Explosion) है इसे हम नग्न आंखों से भी देख सकते हैं। इस विस्फोट(Explosion) से लगभग 10^47 J की ऊर्जा निकलती है जो लगभग सूर्य के द्रव्यमान के तीन गुने द्रव्यमान को ऊर्जा में परिवर्तन करने पर आता है। इसका विस्फोट(Explosion) का प्रकाश पूरे मंदाकिनी(Galaxy) में दिखता है विस्फोट(Explosion) के समय अधिनवतारा(Supernova) से गैस बादल के रूप में निकलते हैं और अंतराताकीय माध्यम(InterStellar Medium) में 10000km/sec की रफ्तार से फैल जाता है। यह बादल धीरे-धीरे अंतराताकीय माध्यम(InterStellar Medium) में मिल जाता है और इन बादलों के कारण अंतराताकीय माध्यम(InterStellar Medium) के में भारी तत्वों(Elements) की मात्रा बढ़ जाती है जो कि नए तारे के जन्म देने के लिए उत्तरदाई होता है।अधिनवतारा(Supernova) के विस्फोट(Explosion) के बाद तारा(Star) के प्रारंभिक द्रव्यमान(Initial Mass) पर निर्भर करता है कि विस्फोट(Explosion) के बाद इसका क्या होगा ।
यदि विस्फोटी तारे(Explosive Star) का आरंभिक द्रव्यमान(Initial Mass) सूर्य का द्रव्यमान से 15 गुना या उससे ज्यादा हो तो इसका क्रोड़(Core) कृष्ण विवर(Black Hole) में बदल जाता है तथा अगर विस्फोटी तारे(Explosive Star) का आरंभिक द्रव्यमान(Initial Mass) सूर्य के द्रव्यमान के 10 गुना या उसके आसपास हो तो क्रोड़(Core) न्यूट्रॉन तारा(Neutron Star) बन जाता है।
ऐसा माना जाता है कि हमारा सौरमंडल(Our Solar System) का निर्माण में किसी अंतराताकीय द्रव्य(InterStellarMaterials) से हुआ है जो कि किसी नजदीकी के अधिनवतारे(Supernova) के विस्फोट(Explosion) से हुआ है अंतराताकीय द्रव्य(InterStellarMaterials) इसी विस्फोट(Explosion) से आए हैं तथा अधिनवतारे का जो क्रोड़(Core) बचा उससे सूर्य का निर्माण हुआ होगा और इससे जो द्रव्य(Material) निकले अंतराताकीय द्रव्य(InterStellarMaterials) से हमारे सौरमंडल के ग्रह(Planets),उपग्रह(Satellites),उल्का पिंड(Meteorites),उल्काएं(Meteors) और छोटे तारे(Asteroids) बने होंगे।