पृथ्वी सूर्य के चारों ओर चक्कर क्यों लगाती हैं ?





हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी 365 दिनों में सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है हम लोगों ने अपने स्कूल में पढ़ा है कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बंधी हुई है तथा गुरुत्वाकर्षण बल उसे अपनी कक्षा से बाहर नहीं जाने देता है क्योंकि सूर्य उसे अपनी ओर खींचता है हम सभी जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण बल आकर्षण प्रवृति का होता है वह किसी भी वस्तु को अपनी ओर खींचता है या गुरुत्वाकर्षण बल हमेशा ही वस्तु को अपनी ओर आकर्षित करता है गुरुत्वाकर्षण बल कभी भी प्रतिकर्षण नहीं करता है जब सूर्य हमेशा पृथ्वी को अपनी ओर खींचता है तो पृथ्वी को सूर्य में समा जाना चाहिए या सूर्य से टकरा जाना चाहिए परंतु ऐसा नहीं होता है

न्यूटन के तीसरे नियम के अनुसार हर एक क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया होती है तो यहां गुरुत्वाकर्षण बल को संतुलित कौन करता है जबकि बाहर के दिशा में कोई बल कार्य नहीं कर रहा है यहां अपकेंद्रीय बल कार्य नहीं करता अपकेंद्रीय बल कोई बल नहीं है यह सिर्फ संतुलित करने के लिए एक नाम दिया गया है जिस प्रकार अभिकेंद्रीय बल कोई बल नहीं है गुरुत्वाकर्षण बल को ही हम लोग अभिकेंद्रीय बल कहते हैं क्योंकि वह वृत्तीय पथ पर लग रहा होता है वास्तव में अभिकेंद्रीय बल और अपकेंद्रीय बल कोई बल नहीं है तो यहां पर सूर्य और पृथ्वी के बीच गुरुत्वाकर्षण बल को संतुलित कौन कर रहा है 

गुरुत्वाकर्षण बल को सामान्यत चाल और दाब ही संतुलित करते हैं यहां हम देख सकते हैं कि पृथ्वी अपने चाल से गति करते हुए सूर्य का चक्कर लगाती है पृथ्वी के पास अपनी एक चाल है जिससे वह गति करती है और यही गति सूर्य और पृथ्वी के बीच लग रहे गुरुत्वाकर्षण बल को संतुलित करता है अगर पृथ्वी के चाल कम हो गई तो पृथ्वी सूर्य में समा जाएगी तथा अगर चाल ज्यादा हो जाये तो वो सूर्य से दूर चली  जाएगी 

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